अपठित गद्यांश -20
तुम सुबह से रात तक अपने आस-पास अनेक परिवर्तन होते हुए देखते हो। ये परिवर्तन तुम्हें घर, विद्यालय, खेल के मैदान अथवा किसी अन्य स्थान पर दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए, तुम्हें कुछ ऐसे परिवर्तन दिखाई देते हैं, जैसे-मौसम में आकस्मिक परिवर्तन, वर्षा, पौधों पर फूल आना, बीजों का अंकुरित होना, फलों का पकना, वस्त्रों का सूखना, दिन-रात में परिवर्तन, बर्फ का पिघलना, पानी का भाप बनना, ईंधन का जलना, चावल को पकाना, चपाती बनाना, दूध से दही का बनना, लोहे में जंग लगना, आतिशबाजी का जलना आदि। परिवर्तन से वस्तुओं में विभिन्न प्रकार के प्रत्यावर्तन भी हो सकते हैं; जैसे स्थिति, आकृति, आकार, रंग, अवस्था, तापमान, बनावट तथा संरचना में बदलाव। परिवर्तन का सदैव कोई-न-कोई कारण होता है।
- ‘तुम अपने आस-पास अनेक परिवर्तन देखते हो।’ इस वाक्य में अपने आस-पास’ से तात्पर्य है