अपठित गद्यांश -15
एक दिन एक बकरी भटक कर जंगल में पहुँच गई जब वह घास खा रही थी, तो वहाँ एक शेर आ पहुँचा बकरी वहाँ से हिली नहीं और शेर का मुकाबला करने को तैयार हो गई। यह देखकर शेर बैठ गया और बोला, "नन्हीं बकरी घबराओ मत, में तुम्हें अभी नहीं खाऊँगा। यदि तुम मुझे तीन सत्य बता दो, तो मैं तुम्हें छोड़ सकता हूँ।"
बकरी तुरन्त सोचकर बोली, "धन्यवाद श्रीमान्, में प्रयत्न करूँगी। पहला सत्य यह है कि यदि में लौटकर अपने मित्रों के पास जाऊँ और उन्हें बताऊँ कि मुझे एक शेर मिला जिसने मुझे नहीं खाया, तो वे मेरा विश्वास नहीं करेंगे।" शेर ने कहा, "बिल्कुल ठीक।"
"दूसरा सत्य यह है कि यदि आप अपने मित्रों को बताएँ कि आपको एक बकरी मिली, फिर भी आपने उसे नहीं खाया, तो वे
आपका विश्वास नहीं करेंगे।"
"तुम ठीक कहती हो", शेर ने कहा।
“और, श्रीमान् तीसरा सत्य यह है कि आप यहाँ बैठकर मेरी बात सुन रहे हैं. इसका मतलब यह है कि आप वास्तव में भूखे नहीं है।"
"तुम्हारी यह बात भी ठीक है।", शेर ने कहा, "किन्तु इससे पहले कि मैं अपना इरादा बदलूँ तुम यहाँ से भाग जाओ। अगली बार मैं तुम्हें नहीं बख्झँगा।”
"अगला मौका आ ही नहीं पाएगा। आप मुझे दोबारा नहीं पकड़ पाएँगे", बकरी ने भागते हुए कहा, "यह चौथा सत्य है।"
- “यह देखकर शेर बैठ गया।" यहाँ 'यह'